Term II , Sample Paper – 1 With Answer Key , Class 10th
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प्रतिदर्श प्रश्नपत्र – 1 , द्वितीय सत्र 2021-22

विषय– हिंदी बी
कोड -085
कक्षा दसवीं
विडियो – https://bit.ly/3KTOvWv(प्रश्न पत्र पर चर्चा)
समय:2 घंटे पूर्णांक – 40
सामान्य निर्देश :
* इस प्रश्न पत्र में कुल 2 खंड है – खंड का और खंड ख
* खंड का में कुल 3 प्रश्न हैं दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इनके उत्तर
दीजिए।
* खंड खंड में कुल 5 प्रश्न हैं दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इनके
उत्तर दीजिए।
* कुल प्रश्नों की संख्या 8 है।
* प्रत्येक प्रश्न को ध्यान पूर्व पढ़ते हुए यथासंभव क्रमानुसार उत्तर लिखें।
खंड क
प्रश्न 1 – निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में दीजिए। (2×2=4)
(क) ‘मनुष्य को दूसरों के साथ उदारता से रहना चाहिए और मानवीय एकता को दृढ़ करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। उसे खुद भी सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए और दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देनी चाहिए।’
‘मनुष्यता’ कविता के आधार पर वर्तमान समय में इस कथन की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
(ख) एक देशभक्त और वीर व्यक्ति के मन में देश के लिए क्या इच्छाएँ होती है? इन इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह क्या- क्या करने के लिए तत्पर रहता है? ‘कर चलें हम फ़िदा’ कविता और ‘कारतूस’ एकांकी के आधार पर उत्तर दीजिए।
(ग) भारतीय महानगरीय जीवनशैली भी जापान की जीवन शैली जैसी होती जा रही है।‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर कथन की सत्यता सिद्ध कीजिए।
प्रश्न 2 – निम्नलिखित दो प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर लगभग 60 से 70 शब्दों में दीजिए। (4×1=4)
(क) बार -बार कोरोना की नई लहर के कारण घर में बंद रहकर और ऑनलाईन पढ़-पढ़कर मेरे तो सिर में दर्द रहने लगा है। दोस्तों से मिले साल भर से ज़्यादा हो गया। मुझे तो भविष्य अंधकारमय नज़र आने लगा है। कोविड से पहले कितने अच्छे दिन थे, खुशियाँ ही खुशियाँ , जहाँ चाहो,वहाँ जाओ, जो चाहो,वह करो, जो खाओ ,जो पियो , कोई रोक-टोक नहीं थी। बीते दिन बहुत याद आते हैं ,आनेवाले दिन भी कैसे होंगे ? कोई नही कह सकता।
‘झेन की देन ‘ पाठ के आधार पर एक विद्यार्थी की मनोदशा की समीक्षा कीजिए। मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों को क्या करना चाहिए ? स्थिति को देखते हुए अपने विचार लिखिए।
अथवा
(ख) मनुष्य मरणशील है अतः उसे चाहिए कि वह अपनी सुनिश्चित मृत्यु को अपने कर्मों द्वारा यादगार बना दे, ताकि उसके जाने के पश्चात भी लोग उसे याद करें। केवल अपने लिए चर कर पशुवत जीवन व्यतीत करने की अपेक्षा उसे परोपकार करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए।
मैथिली शरण गुप्त जी ने कहा है,’आह! वही उदार है परोकार जो करें’ इस पंक्ति के संदर्भ में बताइए विश्व बंधुत्व की भावना का क्या है और इसका विस्तार क्यों आवश्यक है?
प्रश्न 3 – पूरक पाठ्यपुस्तक संचयन के किन्हीं तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर दीजिए- (3×2=6)
(क) मैं अकेला हूँ……… सब इतने हो ! ठीक है मुझे मार दो… मैं मर जाऊँगा , लेकिन जीते जी एक धूर जमीन भी तुम्हें नहीं दूँगा, तुम सब ठाकुरबाड़ी के महंत पुजारी से तनिक भी कम नहीं।
हरिहर काका के ऐसा कहने के पीछे कौन- सा दर्द था ? क्या आप हरिहर काका की इस बात से सहमत हैं? दिए गए कथन के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए।
(ख) परचूनिए, आढ़तिए भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी ना समझते। कभी किसी स्कूल अध्यापक से बात होती तो कहते, मास्टर जी हमने इसे क्या तहसीलदार लगवाना है। थोड़ा बड़ा हो जाए तो पंडित घनश्याम दास से लंडे पढ़वाकर दुकान पर बहियाँ लिखने लगा लेंगे। पंडित 6- 8 महीने में लंडे और मुनिमी का सभी काम सिखा देगा। वहाँ तो अभी तक अलिफ- बे- जीम -च भी नहीं सीख पाया है।
लेखक के समय में और वर्तमान शिक्षा के सन्दर्भ में माता-पिता की सोच में आए परिवर्तन को अपने शब्दों में लिखिए।
(ग) ‘‘मेज पर जितने हाथ थे रुक गए। जितनी आँखें थी टोपी के चेहरे पर जम गई। ‘अम्मी’ शब्द इस घर में कैसे आया।अम्मी ! परंपराओं की दीवार डोलने लगी। ये लफ़्ज़ तुमने कहाँ से सीखा?’’
टोपी द्वारा अम्मी शब्द के प्रयोग से घरवालों की प्रतिक्रिया उनकी किस मानसिकता की द्योतक हैं ?क्या आप घरवालों की इस प्रतिक्रिया से सहमत हैं?तर्क सहित उत्तर दीजिए।
खंड ख (लेखन)
प्रश्न 4 – निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 150 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए – (6अंक)
1.अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
* कब शुरू हुआ ?
* प्रादुर्भाव
* योग एक पद्धति
2.हिंदी हमारी पहचान
* मातृभाषा के रूप में
* संपर्क भाषा के रूप में
* हिंदी का भविष्य
3.परीक्षा के कठिन दिन
* परीक्षा की उपयोगिता
*परीक्षा – जीवन की कसौटी
* परीक्षा में सफलता के उपाय
प्रश्न 5 – टेलीविजन पर प्रसारित अंधविश्वास व तंत्र-मंत्र के कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्री को 120 शब्दों में एक पत्र लिखिए । (5अंक)
अथवा
नित नए रोगों की उत्पत्ति की ओर ‘भारतीय स्वास्थ्य संगठन’ का ध्यान आकृष्ट करने के लिए किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को 120 शब्दों में एक पत्र लिखिए ।
प्रश्न 6 (क)- आपकी सोसाइटी में ‘नैसर्गिक स्वास्थ्य केंद्र’ एक शिविर लगाया जा रहा है जिसमें निशुल्क शुगर, बी.पी. और थाइराइड की जाँच की जाएगी और आप सोसाइटी के सचिव हैं। केंद्र के बारे में जानकारी देते हुए 50 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए । (2.5 अंक)
अथवा
आप हिन्दी छात्र परिषद के सचिव हैं । आगामी वार्षिकोत्सव के बारे में ,विद्यालय की दीवार पट्टिका के लिए 50 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए ।
(ख) खेल विभागाध्यक्ष की ओर से विद्यालय की क्रिकेट टीम के चयन हेतु आयोजित होने वाले शिविर से संबन्धित 50 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए । (2.5 अंक)
अथवा
पुस्तक प्रदर्शिनी में विद्यार्थियों को आने के लिए, प्रधानाचार्य की ओर से 50 शब्दों में एक सूचना तैयार कीजिए ।
प्रश्न 7 – (क) पर्यावरण विभाग की ओर से जल – संरक्षण का आग्रह करते हुए 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए| (2.5 अंक)
अथवा
‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए|
(ख) आप अपना मकान बेचना चाहते हैं। उसके मूल्य एवं अन्य खूबियों का उल्लेख करते हुए 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए। (2.5 अंक)
अथवा
विद्यालय के वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा निर्मित हस्तकला की वस्तुओं की प्रदर्शनी के प्रचार हेतु 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए|
प्रश्न 8 – निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 120 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए। (5अंक)
अभ्यास की शक्ति
अथवा
और जब भयानक सपना देखकर मै डर के मारे काँपने लगा/लगी ……
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समाधान पत्र
उत्तर 1 (क) – मनुष्य को दूसरों के साथ उदारता………… आगे बढ़ने की प्रेरणा देनी चाहिए। वर्तमान समय में इस कथन की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है क्योंकि आज दुनिया में स्वार्थवृत्ति,अहंकार,लोभ,ईर्ष्या,छल-कपट आदि बढ़ रहा हैं जिससे मनुष्य -मनुष्य में दूरी बढ़ रही है। मनुष्यता कविता हमें सच्चा मनुष्य बनने की राह दिखाती है। मनुष्य को इस कविता द्वारा सभी मनुष्यों को अपना भाई मानने, उनकी भलाई करने और एकता बनाकर रखने की सीख दी गई है।
उत्तर 1 (ख) – कर चलें हम पिता कविता और कारतूस एकांकी के अनुसार एक देशभक्त और वीर व्यक्ति अपनी मातृभूमि से लगाव रखते हुए, देश के लिए जीता और मरता है वह शत्रुओं से हर समय मुकाबले के लिए तैयार रहता है, अपने प्राणों की परवाह किए बिना हर संकट को झेलने के लिए तैयार रहता है। एक एक सच्चा देशभक्त और वीर व्यक्ति अपनी जवानी को तभी सार्थक मानता है जब वह शत्रुओं से युद्ध करते हुए अपने प्राणों की बलि दे दें और उसके खून की एक बूंद समाज के देश के काम आ जाए।
उत्तर 2 (क) – कोरोना के इस समय में विद्यार्थियों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोस्तों से मिल नहीं पाते, घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। इस सब के कारण विद्यार्थियों के सिर में दर्द रहने लगा है ,ठीक से नींद नहीं आती, ज़रा ज़रा सी बात पर चिड़चिड़े हो जाते हैं और उदास रहने लगे हैं, विद्यार्थियों की मनोदशा भी बिगड़ रही है। मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों को एकांत में ध्यान लगाना चाहिए, अपने कार्यों को करने के लिए योजना बनानी चाहिए, भूत और भविष्य के बारे में न सोचकर वर्तमान समय का सामना समझदारी से और संतुलन बना कर करना चाहिए।
उत्तर 2 (ख)- मैथिली शरण गुप्त जी ने सही कहा है, ’आह! वही उदार है परोकार जो करें’ वास्तव में दयालु वही है जो दूसरों की भलाई में लगा रहता है, दूसरों की भलाई के लिए जीने मरने वाले ही सच्चे मनुष्य होते हैं। विश्व के प्राणियों को एक समान समझना और अपना जीवन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित कर देना तथा दूसरों के साथ अपनेपन का भाव बनाए रखना यही विश्व बंधुत्व की भावना है। विश्व बंधुत्व की भावना का विस्तार इसलिए आवश्यक है क्योंकि इसी के द्वारा मानव जाति का, समाज का, देश का और संसार का उत्थान संभव है।
उत्तर 3 (क) – मैं अकेला हूँ…… तनिक भी कम नहीं। यह कथन तब का है जब हरिहर काका के भाई जबरदस्ती हरिहर काका की जमीन हथियाने के लिए मार पिटाई पर उतर आए थे। हरिहर काका के ऐसा कहने के पीछे टूटते रिश्तों का,उनके स्वार्थी होने की सच्चाई का गहरा दर्द छिपा है क्योंकि भाइयों के परिवार के प्रति उनका मोह भंग हो चुका था। वे जान चुके थे कि उनके भाई स्वार्थ में आकंठ डूबे हुए हैं उन्हें हरिहर काका से नहीं बल्कि उनकी जमीन जायदाद से प्यार है जिसके लिए वे हरिहर काका की जान लेने के लिए भी तैयार थे। हरिहर काका अपने भाइयों की सच्चाई जानकर बहुत दुखी थे।अपने जीते जी अपनी जमीन भाइयों को न देने का हरिहर काका का फैसला बिल्कुल सही था, हम हरिहर काका की इस बात से बिलकुल सहमत है क्योंकि जमीन लेने के बाद उनके भाई उन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंक देते ।
उत्तर 3 (ख)- लेखक के समय में शिक्षा के बारे में माता पिता के विचार और वर्तमान समय में शिक्षा के संदर्भ में माता पिता के विचारों में बहुत परिवर्तन आया है। लेखक के समय में अधिकांश माता-पिता अनपढ़ थे ,वे निरक्षर होने के कारण शिक्षा के महत्व को नहीं समझते थे परन्तु वर्तमान समय शिक्षा को लेकर माता पिता के विचारों में बहुत परिवर्तन आया है आजकल के माता-पिता स्वयं शिक्षित हैं,ज़्यादातर नौकरीपेशा हैं इसीलिए वे शिक्षा के महत्व को भी समझते हैं। वर्तमान समय में माता पढ़े लिखे माता-पिता यह जानते हैं कि कि शिक्षा की नींव अलग अगर मजबूत होगी तो बच्चे का भविष्य भी उज्ज्वल होगा, बिना शिक्षा प्राप्त किए जिंदगी में आगे बढ़ पाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है।
उत्तर 3 (ग) – टोपी द्वारा अम्मी शब्द के प्रयोग से घरवालों की प्रतिक्रिया उनकी संकीर्ण मानसिकता की द्योतक है। टोपी के घरवाले जाति धर्म में विश्वास रखते थे उन्हें अम्मी शब्द कहने सुनने में भी आपत्ति थी वे सभी बच्चे की भावनाओं को समझने में असमर्थ थे। टोपी की भावनाओं कि किसी को भी परवाह नहीं थी।
हम घरवालों की इस प्रतिक्रिया से पूर्णतः असहमत हैं क्योंकि प्रेम धर्म जाति के बंधन को नहीं मानता और एक बालक के मन भाव मनोभावों को समझना घरवालों का कर्तव्य है टोपी के घरवालों ने उसकी भावनाओं को समझे बिना ही मम्मी कहने पर उसकी पिटाई भी की जो पूर्णतः अनुचित है।
उत्तर 4 – भूमिका – 1
विषयवस्तु – 4
भाषा – 1
उत्तर 5 – आरंभ और अंत की औपचारिकताएँ – 1
विषयवस्तु – 3
भाषा – 1
उत्तर 6 – औपचारिकताएँ – 1/2
विषयवस्तु – 1+1/2
भाषा – ½
उत्तर 7 – विषयवस्तु – 1
प्रस्तुति – 1
भाषा – 1/2
उत्तर 8 – विषयवस्तु – 2
प्रस्तुति – 2
भाषा – 1
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