Madhu kalash.

कुछ सीखें / खुद को खर्च करें / ताकि दुनिया आपको सर्च करे ।

Girdhar Kavirai Ki Kundaliya, Explanation

1 min read
kundliyan

kundliyan

                         गिरिधर कविराय की कुंडलिया पाठ व्याख्या   

गिरिधर की कुंडलियाँ’ नीति, व्यवहार और दूरदर्शिता की शिक्षा देती हैं। कवि गिरधर कविराय हमें बिना सोचे-समझे कार्य न करने, अतीत को भूलकर भविष्य को संवारने, वाणी में मधुरता रखने और विपत्ति के समय धैर्य व चतुरता से काम लेने की सीख देते हैं। ये कुंडलियाँ व्यावहारिक जीवन के लिए बेहद प्रासंगिक हैं।

 

You May Like-  https://youtu.be/2ewV_FUkhLI 

बिना बिचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
काम बिगारै आपनो, जग में होत हंसाय॥
जग में होत हंसाय, चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान, राग रंग मनहिं न भावै॥
कह ‘गिरिधर कविराय, दु:ख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय मांहि, कियो जो बिना बिचारे॥

शब्दार्थ
बिचारे – विचार किए
करै – करता है
सो  वह
पाछे – पीछे, बाद में
पछिताय – पछताना
बिगारै – बिगाड़ना
जग – संसार
होत – होना
हंसाय – मज़ाक
चित्त – मन, हृदय
सन्मान  सम्मान
राग – गीत-संगीत
कछु – कुछ
टरत न टारे – टलाने पर भी न टलना
खटकत – खटकता या चुभता रहना
जिय – हृदय

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियाँ में कवि यह बताना चाहते हैं कि जो बिना सोचे-समझे किसी काम को करते हैं, बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। कहने का आशय यह है कि हमें सभी काम सोच-विचार करके ही करने चाहिए। जल्दबाज़ी में या बिना सोचे-समझे काम करने पर हम अपने ही काम बिगाड़ देते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप संसार में हमें हँसी का पात्र बनना पड़ता है। आगे कवि कहते हैं कि जब हम दूसरों की हँसी का कारण बनते हैं। तब हमारे मन को भी शांति नहीं मिलती और उसे किसी प्रकार के सुख की अनुभूति नहीं होती। खानपान, सम्मान, गीत-संगीत कोई भी चीज़ हमारे मन को नहीं भाती। गिरिधर कविराय जी कहते हैं कि बिना विचार किया गया कार्य हमें हर समय ऐसा दुख देता है, जिसे टाला भी नहीं जा सकता। और बिना सोचे विचारे किए गए कार्य का खेद हमारे हृदय में खटकता रहता है। कहने का आशय यह है कि बिना सोचे विचारे किए गए कार्य का दुःख व्यक्ति के हृदय में पछतावा बनकर घर कर जाता है। उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है। अतः हमें कोई भी काम बहुत सोच-विचारकर ही करना चाहिए।

You May Like – Pathit Gadyansh, Birju Maharaj Se Sakshatkar, Malhar,NCERT

बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ, बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हंसे न कोइ, चित्त मैं खता न पावै॥
कह ‘गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख समुझि, होइ बीती सो बीती॥

शब्दार्थ
बीती – बीत गई, घटित होना
ताहि – उसको
बिसारि दे – भुला दे
सुधि – समझ, ध्यान
सहज – सहजता या आसानी से
चित – मन
बनि आवै – बन सके
दुर्जन – दुष्ट
चित्त – मन, विचार
खता  पछतावा
करु – करो
परतीती – दृढ़ विश्वास
समुझि – समझकर

व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जो भी बातें या घटनाएँ घटित हो चुकी हैं या बीत चुकी हैं, उन्हें भूलकर हमें आगे बढ़ना चाहिए अर्थात हमें भूतकाल की सभी घटनाओं को भूल कर अपने वर्तमान को समझने की कोशिश करनी चाहिए और आगे आने वाले को सहजता से स्वीकार करना चाहिए। जो कार्य सहज और सरल तरीके से हो सकें, उसी में मन लगाना चाहिए। ऐसा करने पर हम किसी दुष्ट व्यक्ति की हँसी का पात्र बनने से बच जाएंगे और हमारे मन में कोई पछतावा भी नहीं रहेगा। गिरिधर कविराय कहते हैं कि जो मन को सही लगे वही काम करो और आगे जो होने वाला है उसी में अपना सुख देखो, जो पीछे चला गया है उसे बीत जाने दो। कहने का आशय यह है कि हमें जो बात बीत चुकी है, उसे भूलकर आगे आने वाले सुख के बारे में सोचना चाहिए।

कुंडलियों का मुख्य सार –

बिना विचारे जो करे  (सोच-समझकर कार्य करना): पहली कुंडली के अनुसार, बिना सोचे-समझे काम करने से पछताना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति न केवल अपना काम बिगाड़ता है, बल्कि जग में हँसी का पात्र भी बनता है।

बीती ताहीं बिसार दे  (भविष्य पर ध्यान): कवि कहते हैं कि जो बीत गया उसे भूलकर, आने वाले समय (भविष्य) की सुधि लेनी चाहिए। जो काम आसानी से हो सके, उसी में मन लगाना चाहिए।

गुणों की महत्ता  (गुणों को महत्व): कवि बताते हैं कि दुनिया गुणी (गुणवान) लोगों के ही कद्रदान होती है। कोयल की तरह मीठी बोली बोलने वालों को सब पसंद करते हैं, जबकि कौवे की कर्कश आवाज कोई पसंद नहीं करता।

व्यवहारिक सीख  (लाठी व धन): गिरधर जी ने लाठी के महत्व को समझाते हुए बताया है कि यह विपत्ति में रक्षा करती है। साथ ही, जब धन बहुत अधिक हो जाए, तो उसे समाज में दान कर देना चाहिए।

मुख्य शिक्षा:
गिरधर की कुंडलियाँ हमें नैतिक जीवन जीने, धैर्य रखने और समझदारी से काम लेने की प्रेरणा देती हैं, जो आज के समय में भी बहुत उपयोगी हैं। 

गिरिधर कविराय हमें सभी काम सोच-विचार करने की सीख दे रहे हैं क्योंकि जल्दबाज़ी में या बिना सोचे-समझे काम करने पर हम अपने ही काम बिगाड़ देते हैं, जिससे हमारे मन को भी शांति नहीं मिलती और बिना सोचे विचारे किए गए कार्य का दुःख व्यक्ति के हृदय में पछतावा बनकर घर कर जाता है। गिरिधर कविराय हमें बीती घटनाओं को भूलकर आगे आने वाले सुख के बारे में सोचने की सीख दे रहे हैं। यह लेख विद्यार्थियों की परीक्षा में सहायक है क्योंकि इसमें शब्दार्थ सहित व्याख्या दिए गए हैं। 

 

 

           

 21 total views,  21 views today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright ©2022, All rights reserved. | Newsphere by AF themes.
error: Content is protected !!