Pathit Gadyansh, Ped Ki baat, पठित गद्यांश, पेड़ की बात, Class 6,Malhar,NCERT
1 min readनिम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये-
1
बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे। इसी तरह महीना-दर-महीना बीतता गया। सर्दियों के बाद वसंत आया। उसके बाद वर्षा की शुरुआत में दो-एक दिन पानी बरसा। अब और छिपे रहने की आवश्यकता नहीं थी! मानों बाहर से कोई शिशु को पुकार रहा हो, ‘और सोए मत रहो, ऊपर उठ जाओ, सूरज की रोशनी देखो।’ आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया, दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला। अंकुर का एक अंश नीचे माटी में मज़बूती से गड़ गया और दूसरा अंश माटी भेदकर ऊपर की ओर उठा। क्या तुमने अंकुर को उठते देखा है? जैसे कोई शिशु अपना नन्हा-सा सिर उठाकर आश्चर्य से नई दुनिया को देख रहा है!
1.बीज का ढक्कन किस समय दरक गया?
(क) गर्मियों में
(ख) शरद ऋतु में
(ग) वर्षा ऋतु की शुरुआत में
(घ) पतझड़ के समय
उत्तर-(ग) वर्षा ऋतु की शुरुआत में
2.अंकुर का कौन-सा भाग मिट्टी में मजबूती से गड़ जाता है?
(क) ऊपरी भाग
(ख) निचला भाग
(ग) पूरा अंकुर
(घ) केवल पत्तियाँ
उत्तर-(ख) निचला भाग
3.अंकुर के ऊपर उठने की तुलना किससे की गई है?
(क) नन्हे बच्चे के सिर उठाने से
(ख) परिंदे के उड़ने से
(ग) नदी के बहने से
(घ) सूरज के चमकने से
उत्तर-(क) नन्हे बच्चे के सिर उठाने से
4.लेखक ने बीज के अंकुरण की प्रक्रिया को किसके जागने की तरह बताया है?
उत्तर– लेखक ने बीज के अंकुरण को ऐसे बताया है जैसे कोई शिशु गहरी नींद से जागकर आश्चर्य से नई दुनिया को देख रहा हो।
5.अंकुर का कौन-सा भाग ऊपर उठता है और कौन-सा भाग नीचे जाता है?
उत्तर-अंकुर का एक भाग (तना) ऊपर की ओर बढ़ता है और दूसरा भाग (जड़) मिट्टी में मजबूती से गड़ा रहता है।
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वृक्ष का अंकुर निकलने पर जो अंश माटी के भीतर प्रवेश करता है, उसका नाम जड़ है और जो अंश ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे तना कहते हैं। सभी पेड़-पौधों में ‘जड़ व तना’ ये दो भाग मिलेंगे। यह एक आश्चर्य की बात है कि पेड़-पौधों को जिस तरह ही रखो, जड़ नीचे की ओर जाएगी व तना ऊपर की ओर उठेगा। एक गमले में पौधा था। परीक्षण करने के लिए कुछ दिन गमले को औंधा लटकाए रखा।
पौधे का सिर नीचे की तरफ़ लटका रहा और जड़ ऊपर की ओर रही। दो-एक दिन बाद क्या देखता हूँ कि जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो। उसकी सब पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ आईं तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई। तुमने कई बार सर्दियों में मूली काटकर बोई होगी। देखा होगा, पहले पत्ते व फूल नीचे की ओर रहे। कुछ दिन बाद देखोगे कि पत्ते और फूल ऊपर की ओर उठ आए हैं।
1.वृक्ष के अंकुर का कौन-सा भाग मिट्टी के अंदर प्रवेश करता है?
(क) जड़
(ख) पत्तियाँ
(ग) तना
(घ) शाखाएँ
उत्तर– (क) जड़
2.पेड़-पौधों को किसी भी दिशा में रखने पर उनका तना किस ओर बढ़ता है?
(क) नीचे की ओर
(ख) ऊपर की ओर
(ग) टेढ़ा होकर बढ़ता है
(घ) स्थिर रहता है
उत्तर-(ख) ऊपर की ओर
3.परीक्षण के लिए जब गमले को औंधा लटकाया गया, तो पौधे ने कैसा व्यवहार किया?
(क) वह उसी अवस्था में बना रहा
(ख) तना नीचे और जड़ ऊपर ही रही
(ग) पत्तियाँ और डालियाँ ऊपर की ओर उठ गईं और जड़ नीचे की ओर मुड़ गई
(घ) पौधा सूख गया
उत्तर-(ग) पत्तियाँ और डालियाँ ऊपर की ओर उठ गईं और जड़ नीचे की ओर मुड़ गई
4.जड़ और तने की दिशा का निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर-जड़ हमेशा नीचे की ओर बढ़ती है क्योंकि वह गुरुत्वाकर्षण की ओर आकर्षित होती है, जबकि तना ऊपर की ओर बढ़ता है क्योंकि वह प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रयास करता है।
5.मूली को काटकर बोने के बाद उसमें क्या परिवर्तन देखने को मिलता है?
उत्तर– मूली को काटकर बोने के बाद शुरू में उसके पत्ते और फूल नीचे की ओर रहते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वे ऊपर की ओर उठ जाते हैं।
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इसके अलावा वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं। सूक्ष्मदर्शी के जरिए अनगिनत मुँह पर अनगिनत होंठ देखे जा सकते हैं। जब आहार करने की ज़रूरत न हो तब दोनों होंठ बंद हो जाते हैं। जब हम श्वास-प्रश्वास ग्रहण करते हैं तब प्रश्वास के साथ एक प्रकार की विषाक्त वायु बाहर निकलती है, उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं। अगर यह ज़हरीली हवा पृथ्वी पर इकट्ठी होती रहे तो तमाम जीव-जंतु कुछ ही दिनों में उसका सेवन करके नष्ट हो सकते हैं। ज़रा विधाता की करुणा का चमत्कार तो देखो, जो जीव-जंतुओं के लिए जहर है, पेड़-पौधे उसी का सेवन करके उसे पूर्ण तथा शुद्ध कर देते हैं। पेड़ के पत्तों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तब पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं। और यही अंगार वृक्ष के शरीर में प्रवेश करके उसका संवर्द्धन करते हैं। पेड़-पौधे प्रकाश चाहते हैं। प्रकाश न मिलने पर ये बच नहीं सकते। पेड़-पौधों की सर्वाधिक कोशिश यही रहती है कि किसी तरह उन्हें थोड़ा-सा प्रकाश मिल जाए। यदि खिड़की के पास गमले में पौधा रखो, तब देखोगे कि सारी पत्तियाँ व डालियाँ अंधकार से बचकर प्रकाश की ओर बढ़ रही हैं। वन-अरण्य में जाने पर पता लगेगा कि तमाम पेड़-पौधे इस होड़ में सचेष्ट हैं कि कौन जल्दी से सिर उठाकर पहले प्रकाश को झपट ले। बेल-लताएँ छाया में पड़ी रहने से, प्रकाश के अभाव में मर जाएँगी। इसलिए वे पेड़ों से लिपटती हुई, निरंतर ऊपर की ओर अग्रसर होती रहती हैं।
1.वृक्ष के पत्तों में छोटे-छोटे मुँह किस उद्देश्य से होते हैं?
(क) जल संग्रहण के लिए
(ख) आहार ग्रहण करने के लिए
(ग) वायु प्रवाह के लिए
(घ) कीड़ों को आकर्षित करने के लिए
उत्तर- (ख) आहार ग्रहण करने के लिए
2.‘अंगारक’ वायु किसे कहते हैं?
(क) ऑक्सीजन
(ख) नाइट्रोजन
(ग) कार्बन डाइऑक्साइड
(घ) हाइड्रोजन
उत्तर- (ग) कार्बन डाइऑक्साइड
3.बेल-लताओं को जीवित रहने के लिए क्या करना पड़ता है?
(क) वे अन्य पेड़ों से लिपटकर ऊपर चढ़ती हैं
(ख) वे जमीन में गहराई तक चली जाती हैं
(ग) वे अधिक मात्रा में जल संग्रह करती हैं
(घ) वे अंधकार में भी बढ़ सकती हैं
उत्तर-(क) वे अन्य पेड़ों से लिपटकर ऊपर चढ़ती हैं
4.पेड़-पौधे ‘अंगारक’ वायु से क्या करते हैं?
उत्तर-पेड़-पौधे ‘अंगारक’ वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) को ग्रहण करके उसे शुद्ध बना देते हैं। सूर्य के प्रकाश की सहायता से वे इसे अपने बढ़ने के लिए उपयोग करते हैं।
5.पेड़-पौधों की सर्वाधिक कोशिश क्या होती है?
उत्तर-पेड़-पौधे हमेशा प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं, क्योंकि प्रकाश के बिना वे जीवित नहीं रह सकते।
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वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं। मधुमक्खी व तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। मधुमक्खी के आगमन से वृक्ष का भी उपकार होता है। तुम लोगों ने फूल में पराग-कण देखे होंगे। मधुमक्खियाँ एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं। पराग-कण के बिना बीज पक नहीं सकता।
इस प्रकार फूल में बीज फलता है। अपने शरीर का रस पिलाकर वृक्ष बीजों का पोषण करता है। अब अपनी जिंदगी के लिए उसे मोह-माया का लोभ नहीं है। तिल-तिल कर संतान की खातिर सब-कुछ लुटा देता है। जो शरीर कुछ दिन पहले हरा-भरा था, अब वह बिल्कुल सूख गया है। अपने ही शरीर का भार उठाने की शक्ति क्षीण हो चली है। पहले हवा बयार करती हुई आगे बढ़ जाती थी। पत्ते हवा के संग क्रीड़ा करते थे। छोटी-छोटी डालियाँ ताल-ताल पर नाच उठती थीं। अब सूखा पेड़ हवा का आघात सहन नहीं कर सकता। हवा का बस एक थपेड़ा लगते ही वह थर-थर काँपने लगता है। एक-एक करके सभी डालियाँ टूट पड़ती हैं। अंत में एक दिन अकस्मात पेड़ जड़ सहित भूमि पर गिर पड़ता है।
इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।
1.वृक्ष अपने बीजों का पोषण किस प्रकार करता है?
(क) हवा और पानी से
(ख) अपने शरीर का रस देकर
(ग) सूरज की रोशनी से
(घ) मिट्टी के खनिज से
उत्तर– (ख) अपने शरीर का रस देकर
2.वृक्ष के सूखने का मुख्य कारण क्या होता है?
(क) पानी की कमी
(ख) सूरज की रोशनी की अधिकता
(ग) संतान के लिए अपने सभी पोषक तत्व लुटा देना
(घ) मिट्टी की उर्वरता का कम होना
उत्तर– (ग) संतान के लिए अपने सभी पोषक तत्व लुटा देना
3.बीज बनने की प्रक्रिया कैसे होती है?
उत्तर– वृक्ष अपने फूलों में पराग-कण उत्पन्न करता है, जिसे मधुमक्खियाँ और तितलियाँ एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचाती हैं। इससे बीज बनने की प्रक्रिया पूरी होती है।
4.वृक्ष का जीवन समाप्त होने का मुख्य कारण क्या होता है?
उत्तर– वृक्ष अपने जीवन में संतान के लिए तिल-तिल करके अपने पोषक तत्व लुटा देता है। जब उसके अंदर कोई शक्ति शेष नहीं रहती, तो वह सूख जाता है और अंत में गिर जाता है।
5.सूखा वृक्ष हवा का आघात क्यों नहीं सह पाता?
उत्तर-क्योंकि वृक्ष जब तक हरा-भरा रहता है, तब तक उसमें लचक और मजबूती होती है। लेकिन जब वह सूख जाता है, तो उसकी डालियाँ कमजोर हो जाती हैं और तेज हवा के झोंकों से टूटकर गिर जाती हैं।
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