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Pathit Gadyansh, Do Gauriya, दो गौरैया,Class 8, Malhar,NCERT

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पठित काव्यांश

पठित काव्यांश

                                    दो गौरैया

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1.घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं माँ, पिताजी और मैं। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है। हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं। (पृष्ठ 13)

प्रश्न 1.लेखक के अनुसार घर में कितने सदस्य रहते हैं ?
(क) चार

(ख) दो
(ग) तीन
(घ) पाँच
उत्तर:
(ग) तीन

प्रश्न 2.पिताजी घर को किसका मानते हैं?
(क) पड़ोसियों का
(ख) पशु-पक्षियों का
(ग) माँ का
(घ) किराएदारों का
 

प्रश्न 3.‘हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं’ – यह किसका कथन है?
(क) लेखक का

(ख) माँ का
(ग) पिताजी का
(घ) बिल्ली का
 

प्रश्न 4.‘घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं’ – यह किसकी ओर संकेत करता है?
(क) मकान मालिक की ओर

(ख) सरकार की ओर
(ग) पशु-पक्षियों की ओर
(घ) बिल्लियों की ओर
 

प्रश्न 5.इस गद्यांश से लेखक का दृष्टिकोण क्या प्रकट होता है ?
(क) व्यंग्यात्मक

(ख) सहानुभूतिपूर्ण
(ग) कठोर
(घ) क्रोधित
 

उत्तर

(1) (ग) तीन  

(2) (ख) पशु-पक्षियों का  

(3) (ग) पिताजी का  

(4) (ग) पशु-पक्षियों की ओर

(5) (ख) सहानुभूतिपूर्ण

 

2.आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। जो भी पक्षी पहाड़ियों घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो । यहाँ कभी तोते पहुँच जाते हैं, तो कभी कौवे और कभी तरह-तरह की गौरैयाँ । वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! (पृष्ठ 13)

प्रश्न 1.लेखक के घर के आँगन में कौन-सा पेड़ है?
(क) नीम

(ख) आम
(ग) पीपल
(घ) बबूल
 

प्रश्न 2.कौन-से पक्षी लेखक के घर आते हैं?
(क) मोर

(ख) तोते
(ग) केवल कबूतर
(घ) तोते, कौवे और गौरैयाँ
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प्रश्न 3.पिताजी पक्षियों के आने पर क्या कहते हैं?
(क) उन्हें भगाओ।

(ख) ये हमारे घर क्यों आते हैं?
(ग) ये दिल्ली से सीधा हमारे घर आते हैं।
(घ) पक्षी बर्बादी करते हैं।
  

प्रश्न 4.लेखक पक्षियों की आवाज़ के बारे में क्या कहता है ?
(क) बहुत मधुर होती है।

(ख) सुनाई नहीं देती।
(ग) कानों के परदे फाड़ देती है।
(घ) गूँजती रहती है।
 

प्रश्न 5.गद्यांश के अनुसार, लेखक के घर पक्षियों को आश्रय देना किस भावना को दर्शाता है?
(क) डर

(ख) क्रोध
(ग) अपनापन और प्राकृतिक जुड़ाव
(घ) ऊब
 
 उत्तर

(1) (ख) आम  

(2) (घ) तोते, कौवे और गौरैयाँ  

(3) (ग) ये दिल्ली से सीधा हमारे घर आते हैं।   

(4) (ग) कानों के परदे फाड़ देती है। 

(5) (ग) अपनापन और प्राकृतिक जुड़ाव
  

 

 

3.घर के अंदर भी यही हाल है। बीसियों तो चूहे बसते हैं। रात-भर एक कमरे से दूसरे कमरे में भागते फिरते हैं। वह धमा चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। बर्तन गिरते हैं, डिब्बे खुलते हैं, प्याले टूटते हैं। एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है। एक दूसरा है जिसे बाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठना पसंद है। उसे शायद गर्मी बहुत लगती है। बिल्ली हमारे घर में रहती तो नहीं मगर घर उसे भी पसंद है और वह कभी -कभी झाँक जाती है। मन आया तो अंदर आकर दूध पी गई, न मन आया तो बाहर से ही फिर आऊँगीकहकर चली जाती है। (पृष्ठ 13-14)

 प्रश्न 1. लोग ठीक तरह से सो क्यों नहीं पाते ?

(क) चूहों की धमा चौकड़ी के कारण

(ख) बिल्लियों की धमा चौकड़ी के कारण

(ग) दूध पीने के कारण

(घ) खेलने के कारण

 

प्रश्न 2.बिल्ली को घर क्यों पसंद है?
(क) खाने के लिए

(ख) सोने के लिए
(ग) खेलने के लिए
(घ) दूध पीने के लिए
 

प्रश्न 3.‘धमा- चौकड़ीशब्द किसके लिए प्रयोग हुआ है?
(क) पिताजी के लिए

(ख) चूहों और जीव-जंतुओं के लिए
(ग) बच्चों के लिए
(घ) पक्षियों के लिए
 

प्रश्न 4.चूहा कहाँ बैठा रहता है ?
(क) पलंग पर

(ख) अंगीठी के पीछे
(ग) डिब्बे के ऊपर
(घ) टेबल के नीचे
 

प्रश्न 5.इस गद्यांश में कौन-कौन से जीवों का उल्लेख है?
(क) चूहा और बिल्ली

(ख) बिल्ली और कुत्ता
(ग) गाय और चिड़ियाँ
(घ) चूहा और तोता
 
 उत्तर

(1) (क) चूहों की धमा चौकड़ी के कारण

(2) (घ) दूध पीने के लिए   

(3) (ख) चूहों और जीव-जंतुओं के लिए  

(4) (ख) अंगीठी के पीछे 

(5) (क) चूहा और बिल्ली  

 

4.अब एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं। पिताजी कहने लगे कि मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं। कभी वे किसी रोशनदान पर जा बैठतीं, तो कभी खिड़की पर। फिर जैसे आई थीं वैसे ही उड़ भी गईं। पर दो दिन बाद हमने क्या देखा कि बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में उन्होंने अपना बिछावन बिछा लिया है और सामान भी ले आईं हैं और मजे से दोनों बैठी गाना गा रही हैं। जाहिर है, उन्हें घर पसंद आ गया था।

माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे। थोड़ी देर बाद माँ सिर हिलाकर बोलीं, “अब तो ये नहीं उड़ेंगीं। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।

इस पर पिताजी को गुस्सा आ गया। वह उठ खड़े हुए और बोले, “देखता हूँ ये कैसे यहाँ रहती हैं ! गौरैयाँ मेरे आगे क्या चीज हैं! मैं अभी निकाल बाहर करता हूँ।” (पृष्ठ 14-15)

प्रश्न 1.दोनों गौरैयों ने कहाँ प्रवेश किया?
(क) बगीचे में

(ख) छत पर
(ग) सीधे घर के अंदर
(घ) दीवार में
  

प्रश्न 2.पिताजी ने गौरैयाँ के आने पर क्या कहा?
(क) उन्हें भगाओ

(ख) ये हमारा घर गंदा करेंगी
(ग) मकान का निरीक्षण कर रही हैं।
(घ) इनके लिए दाना लाओ
 

प्रश्न 3.माँ ने क्या कहा?
(क) इन्होंने घोंसला बना लिया है।

(ख) अब ये नहीं जाएँगी।
(ग) इन्हें पहले भगा देना चाहिए था।
(घ) दिए गए सभी ।
 

प्रश्न 4.पिताजी ने गुस्से में क्या कहा ?
(क) देखता हूँ कैसे यहाँ रहती हैं!

(ख) गौरैयाँ मेरे आगे क्या चीज हैं !
(ग) मैं उनके पर काट दूँगा ।
(घ) (क) और (ख) दोनों।
 

प्रश्न 5.क्या गौरैयाँ घरवालों से डरती थी?
(क) गौरैयाँ पिताजी से डरती थीं।

(ख) लेखक उन्हें धमकाकर रखता था।
(ग) माँ भी कभी-कभी डाँट देती थीं।
(घ) उन्हें किसी का भी डर नहीं था।
 
 उत्तर

(1) (ग) सीधे घर के अंदर  

(2) (ग) मकान का निरीक्षण कर रही हैं।  

(3) (घ) दिए गए सभी   

(4) (घ) (क) और (ख) दोनों 

(5) (घ) उन्हें किसी का भी डर नहीं था
  

 

5.अब तो पिताजी गौरैयों पर पिल पड़े। उन्होंने दरवाजों के नीचे कपड़े ठूंस दिए ताकि कहीं कोई छेद बचा नहीं रह जाए। और फिर लाठी झुलाते हुए उन पर टूट पड़े। चिड़ियाँ चीं-चीं करती फिर बाहर निकल गईं। पर थोड़ी ही देर बाद वे फिर कमरे में मौजूद थीं। अबकी बार वे रोशनदान में से आ गई थीं जिसका एक शीशा टूटा हुआ था।

देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो,” माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा, अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब ये यहाँ से नहीं जाएँगी।
क्या मतलब? मैं कालीन बरबाद करवा लूँ?” पिताजी बोले और कुर्सी पर चढ़कर रोशनदान में कपड़ा ठूंस दिया और फिर लाठी झुलाकर एक बार फिर चिड़ियों को खदेड़ दिया। दोनों पिछले आँगन की दीवार पर जा बैठीं ।

इतने में रात पड़ गईं हम खाना खाकर ऊपर जाकर सो गए। जाने से पहले मैंने आँगन में झाँककर देखा, चिड़ियाँ वहाँ पर नहीं थीं। मैंने समझ लिया कि उन्हें अक्ल आ गई होगी। अपनी हार मानकर किसी दूसरी जगह चली गई होंगी। (पृष्ठ 16)

प्रश्न 1.पिताजी ने चिड़ियों को किससे भगाना चाहा ?
(क) पत्थर से

(ख) लाठी से
(घ) तकिए से
(ग) डंडे से
 

प्रश्न 2.माँ ने पिताजी को क्या कहा?
(क) ‘उन्हें मार दो।’

(ख) ‘चुप रहो ।’
(ग) ‘घर छोड़ दो।’
(घ) ‘चिड़ियों को मत निकालो।’
 

प्रश्न 3.पिताजी ने रोशनदान में क्या ठूंस दिया?
(क) लकड़ी

(ख) कपड़ा
(ग) किताब
(घ) झाड़
 
 

प्रश्न 4.लेखक ने रात को क्या सोचा?
(क) चिड़ियाँ वापस आ जाएँगी।

(ख) चिड़ियाँ कहीं और चली गई होंगी ।
(ग) चिड़ियाँ मर गई होंगी ।
(घ) चिड़ियाँ घर छोड़ देंगी।
 

प्रश्न 5.चिड़ियाँ पंखे के गोले से कहाँ बैठ जाती थीं?
(क) अलमारी पर

(ख) छत पर
(ग) आँगन की दीवार पर
(घ) कुर्सी पर
 

उत्तर

(1) (ख) लाठी से  

(2) (घ) चिड़ियों को मत निकालो।   

(3) (ख) कपड़ा  

(4) (ख) चिड़ियाँ कहीं और चली गई होंगी । 

(5) (ग) आँगन की दीवार पर  

 

6.तभी पंखे के ऊपर से चीं-चीं की आवाज सुनाई पड़ी। और माँ खिलखिलाकर हँस दी। मैंने सिर उठाकर ऊपर की ओर देखा, दोनों गौरैयाँ फिर से अपने घोंसले में मौजूद थीं।

दरवाजे के नीचे से आ गई हैं,” माँ बोलीं।

मैंने दरवाजे के नीचे देखा । सचमुच दरवाजों के नीचे थोड़ी-थोड़ी जगह खाली थी।
पिताजी को फिर गुस्सा आ गया। माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं । (पृष्ठ 16)

प्रश्न 1.गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया था?
(क) पेड़ पर

(ख) अलमारी में
(ग) पंखे के गोले पर
(घ) खिड़की के कोने में
 

प्रश्न 2.पिताजी का रवैया कैसा था ?
(क) सहानुभूति भरा

(ख) प्रेमपूर्ण
(ग) आक्रामक
(घ) उदासीन

प्रश्न 3.माँ की हँसी का कारण क्या था?
(क) पिताजी का चिल्लाना

(ख) गौरैया का वापस आना
(ग) पिताजी की मेहनत व्यर्थ होना
(घ) इसमें से कोई नहीं
 
 

प्रश्न 4.गौरैयाँ कहाँ से आ गई थीं?
(क) रोशनदान से

(ख) दरवाजे से
(ग) खिड़की से
(घ) टंकी से
 

प्रश्न 5.पिताजी को गुस्सा क्यों आया ?
(क) चिड़ियों ने गंद डाल दिया।

(ख) चिड़ियाँ वापिस आ गईं।
(ग) माँ उनका मजाक उड़ा रही थीं।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
 

उत्तर

(1) (ग) पंखे के गोले पर  

(2) (ग) आक्रामक  

(3) (ग) पिताजी की मेहनत व्यर्थ होना   

(4) (ख) दरवाजे से

(5) (ख) चिड़ियाँ वापिस आ गईं
  

7.तभी मैंने बाहर आँगन की ओर देखा और मुझे दोनों गौरैयाँ नज़र आईं। दोनों चुपचाप दीवार पर बैठी थीं। इस बीच दोनों कुछ-कुछ दुबला गई थीं, कुछ-कुछ काली पड़ गईं थीं। अब वे चहक भी नहीं रही थीं। (पृष्ठ 17)

 प्रश्न 1.लेखक ने गौरैयाँ को कहाँ देखा?
(क) पेड़ पर

(ख) आँगन में
(ग) दीवार पर
(घ) छत पर
 

प्रश्न 2.गौरैयों की स्थिति कैसी थी ?
(क) बहुत शोर कर रही थीं।

(ख) चुपचाप बैठी थीं।
(ग) उड़ रही थीं।
(घ) लाठी से लड़ रहीं थीं ।
 

प्रश्न 3.गौरैयाँ दीवार पर ही क्यों बैठी थीं?
(क) क्योंकि पिताजी ने उन्हें भगा दिया था।

(ख) वे अंदर जाने की इंतजार में थीं ।
(ग) वे बहुत लाचार थीं, अपने बच्चों के लिए कुछ नहीं कर पा रही थीं।
(घ) दिए गए सभी ।
 

प्रश्न 3.गौरैयाँ दीवार पर ही क्यों बैठी थीं?
(क) क्योंकि पिताजी ने उन्हें भगा दिया था।

(ख) वे अंदर जाने की इंतजार में थीं ।
(ग) वे बहुत लाचार थीं, अपने बच्चों के लिए कुछ नहीं कर पा रही थीं।
(घ) दिए गए सभी ।

प्रश्न 5.गौरैयों की परेशानी का क्या कारण था ?
(क) भोजन की तलाश

(ख) अपने बच्चों की चिंता
(ग) पिताजी का गुस्सा
(घ) विद्रोह का
 

उत्तर

(1) (ग) दीवार पर   

(2) (ख) चुपचाप बैठी थीं  

(3) (ग) वे बहुत लाचार थीं, अपने बच्चों के लिए कुछ नहीं कर पा रही थीं।   

(4) (ग) स्नेह और आश्चर्य 

(5) (ख) अपने बच्चों की चिंता
  

 

8 “चीं-चीं, चीं-चीं ! फिर आवाज़ आई । मैंने ऊपर देखा। पंखे के गोले के ऊपर से नन्हीं नन्हीं गौरैयाँ सिर निकाले नीचे की ओर देख रही थीं और चीं-चीं किए जा रही थीं। अभी भी पिताजी के हाथ में लाठी थी और उस पर लिपटा घोंसले का बहुत-सा हिस्सा था। नन्हीं-नन्हीं दो गौरैयाँ! वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?

मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा। फिर मैंने देखा, पिताजी स्टूल पर से नीचे उतर आए हैं। और घोंसले के तिनकों में से लाठी निकालकर उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया है और चुपचाप कुर्सी पर आकर बैठ गए हैं। (पृष्ठ 18)

प्रश्न 1.गौरैया किस ओर देख रही थीं?
(क) दीवार की ओर

(ख) ऊपर की ओर
(ग) नीचे की ओर
(घ) बगीचे की ओर
 

प्रश्न 2.घोंसले में क्या था ?
(क) कोई चीज नहीं थी।

(ख) चूजे नहीं थे।
(ग) नन्हीं-नन्हीं गौरैयाँ थीं ।
(घ) धागे और तिनके थे।
 
 

प्रश्न 3.पिताजी का व्यवहार अब कैसा था ?
(क) क्रोधित

(ख) उदास
(ग) शांत और मुस्कुराता हुआ
(घ) हैरान
 

प्रश्न 4.इस दृश्य से कौन सी भावना झलकती है?
(क) हिंसा

(ख) बदलाव और स्वीकार्यता
(ग) द्वेष
(घ) असहायता
 

प्रश्न 5.लेखक अवाक् क्यों रह गया ?
(क) पिताजी के बदलते रूप को देखकर
(ख) गौरैयाँ को देखकर
(ग) घर की स्थिति को देखकर
(घ) पिताजी के गुस्से को देखकर
 

उत्तर

(1) (ग) नीचे की ओर 

(2) (ग) नन्हीं-नन्हीं गौरैयाँ थीं    

(3) (ग) शांत और मुस्कुराता हुआ  

(4) (ख) बदलाव और स्वीकार्यता

(5) (क) पिताजी के बदलते रूप को देखकर

 9.अब तो ये नहीं उडेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होने यहाँ घोंसला बना लिया है।इस पर पिताजी को गुस्सा आ गया। वह उठ खडे हुए और बोले, ‘देखता हूँ ये कैसे यहाँ रहती हैं! गौरैयाँ मेरे आगे क्या चीज़ हैं! मैं अभी निकाल बाहर करता हूँ।’ ‘छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!माँ ने व्यंग्य से कहा। माँ कोई बात व्यंग्य में कहें, तो पिताजी उबल पड़ते हैं, बह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड्रा रही हैं।

प्रश्न 1.माँ का कथन छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए…’ किस प्रकार का है?
(क) हास्य

(ख) सलाह
(ग) व्यंग्य
(घ) गुस्सा

प्रश्न 2.पिताजी को सबसे पहले किस बात पर गुस्सा आया?
(क) चूहों के कारण
(ख) माँ की बात पर
(ग) चिड़ियों के घोसला बना लेने पर
(घ) लेखक के हँसने पर
 

प्रश्न 3. माँ कोई बात व्यंग्य में कहें, तो पिताजी उबल पड़ते हैं। यहाँ उबल पड़तेका क्या अर्थ है?
(क) सख्ज हो जाना

(ख) भावुक हो जाना
(ग) क्रोधित हो जाना
(घ) डरपोक हो जाना
 

उत्तर

(1) (ग) व्यंग्य  

(2) (ग) चिड़ियों के घोसला बना लेने पर   

(3) (ग) क्रोधित हो जाना   

 

10.मैने झट से बाहर की ओर देखा। नहीं, दोनों गौरैयाँ बाहर दीवार पर गुमसुम बैठी थीं। चीं-चीं, चीं-ची!फिर आबाज़ आई। मैने ऊपर देखा। पंखे के गोले के ऊपर से नन्हीं-नन्हीं गौरैयाँ सिर निकाले नीचे की ओर देख रही थीं और चीं-चीं किए जा रही थीं। अभी भी पिताजी के हाथ में लाठी थी और उस पर लिपटा घोंसले का बहुत-सा हिस्सा था। नन्हीं-नन्हीं दो गौरियाँ! वे अभी भी झाँके जा रही थीं और ची-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, ‘हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ है?

प्रश्न 1.लेखक ने नन्हीं गौरैयों की ची-चीं को किस रूप में दर्शाया?
(क) डर

(ख) परिचय और पुकार
(ग) आक्रोश
(घ) शोर
उत्तर :
(ख) परिचय और पुकार

प्रश्न 2.पंखे के ऊपर से सिर निकालकर कौन देख रही थीं?
(क) माँ

(ख) बड़ी गौरैयाँ
(ग) नन्हीं गौरैयाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 3.पिताजी के हाथ में क्या था?
(क) कपड़ा

(ख) अंडा
(ग) टूटे पंखे का डंडा
(घ) घोसले से लिपटी लाठी

 

उत्तर

(1) (ख) परिचय और पुकार   

(2) (ग) नन्हीं गौरैयाँ  

(3) (घ) घोसले से लिपटी लाठी  

     

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